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एक खूबसूरत शुरुआत

कमरे में मोगरे और गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू महक रही थी। चारों तरफ गेंदे और चमेली के फूलों की लड़ियां लटकी हुई थीं। कमरे के बीचो-बीच स्थित उस बड़े से पलंग को फूलों की मखमली चादर से सजाया गया था। यह अवनि के जीवन की सबसे खूबसूरत, लेकिन सबसे घबराहट से भरी रात थी।

दरवाजे की चूड़ियों और पायलों की खनक के साथ, अवनि को उसकी सास, मामी, चाची और ननदें घेरकर कमरे के अंदर लाईं। लाल रंग की भारी बनारसी साड़ी, गले में नौलखा हार, माथे पर बिंदिया और हाथों में रची गहरी पिया के नाम की मेहंदी में लिपटी अवनि की खूबसूरती देखते ही बन रही थी। लाज के मारे उसका चेहरा और भी लाल हो रहा था। उसका घूंघट काफी नीचे तक था, जिससे वह सिर्फ अपनी आलता से रंगे लाल पैरों और बिछियों को ही देख पा रही थी।

सास और चाची ने मिलकर अवनि को बड़े प्यार से उस फूलों से सजे बेड पर बिठाया। अवनि का दिल इतनी जोर से धड़क रहा था, मानो उसकी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही हो।

तभी उसकी ननद रीमा ने चुटकी लेते हुए कहा, "भाभी, भैया तो बस बाहर आने ही वाले हैं। वैसे हमारी मेहंदी का रंग तो बहुत गहरा चढ़ा है, देखना भैया आज अपना दिल पूरी तरह हार बैठेंगे।"

"अरे रीमा, अब ज्यादा मत शर्माओ हमारी दुल्हन को," चाची ने हंसते हुए अवनि के कंधे पर हाथ रखा, लेकिन फिर धीरे से उसके कान के पास झुककर बोलीं, "सुनो अवनि, वो थोड़ा नर्वस हो तो तुम संभाल लेना। शादी की पहली रात है, शर्माना अपनी जगह है, लेकिन अपने पिया को रोक मत देना। आज की रात सिर्फ तुम दोनों की है।"

यह सुनते ही अवनि के गाल लाज से टमाटर की तरह लाल हो गए। उसने घबराहट में अपनी साड़ी के पल्लू को उंगलियों में भींच लिया।

तभी उसकी सास ने हंसते हुए रीमा को डांटा, "चलो, बंद करो तुम सब अपनी खिंचाई।" उन्होंने बेड के पास लगी मेज पर केसर और बादाम से महकता हुआ गुनगुना दूध का गिलास रखा। अवनि के सिर पर ममता से हाथ फेरते हुए उन्होंने कहा, "ये दूध अपने पति को दे देना बेटा। और बिल्कुल मत घबराओ, वो तुम्हें बहुत प्यार करेगा।"

चाची, मामी और ननदों ने एक आखिरी बार अवनि को चिढ़ाते हुए अपनी साड़ियों के पल्लू से मुंह छुपाकर हंसा।

"चलो भाई चलो, अब दूल्हे राजा के आने का वक्त हो गया है। हमें यहाँ से अब विदा होना चाहिए," मामी ने कहा।

एक-एक करके सबने अवनि को आशीर्वाद दिया और कमरे से बाहर निकलने लगीं। रीमा ने जाते-जाते शरारत से कमरे की मद्धम लाइट ऑन की और मुख्य लाइटें बंद कर दीं, जिससे कमरे का माहौल और भी रूमानी और गहरा हो गया।

जैसे ही भारी शीशम का दरवाजा धीरे से बंद हुआ, कमरे में एक गहरा सन्नाटा छा गया। अब कमरे में सिर्फ फूलों की खुशबू, मद्धम रोशनी और अवनि की तेज होती धड़कनें बाकी थीं, जो अपने पिया के कदमों की आहट का इंतजार कर रही थीं।

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