06

शरारत...

खुले बाल, आँखों में शर्म, सिंदूर और मंगलसूत्र ही फिलहाल उसके एकमात्र आभूषण हैं। उसे समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या करे।

देव धीरे से और करीब खिसका। उसकी मजबूत, नग्न छाती अवनि के बाजू से छुई। उसने अपना झुकाव अवनि के संवेदनशील कान की तरफ किया। देव की गर्म, मादक सांसें अवनि के कान के निचले हिस्से को सहला रही थीं, जिससे अवनि की रीढ़ में एक बार फिर सिहरन दौड़ गई।

देव ने अपनी आवाज को बेहद धीमा और गंभीर करते हुए फुसफुसाया, "अवनि... मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूँ। क्या इस शादी से पहले... तुम्हारा कभी किसी के साथ कोई शारीरिक संबंध रहा है?"

यह सवाल अवनि के लिए बिल्कुल अप्रत्याशित था। उसने झटके से अपनी नजरें उठाईं और देव के चेहरे को देखा। उसकी आंखों में एक अजीब सा डर और मासूमियत थी। उसने बिना एक पल गंवाए, बेहद घबराहट और हड़बड़ाहट में अपनी कँपकँपाती आवाज में जवाब दिया, "न... नहीं, कभी नहीं!"

अवनि का यह तुरंत और निष्पाप जवाब सुनकर देव के होठों पर एक गहरी, मादक और संतुष्टि भरी मुस्कान तैर गई। उसकी आँखें चमक उठीं। उसने अवनि की ठुड्डी को अपनी उंगलियों के पोरों से धीरे से छूते हुए कहा, "बहुत अच्छे... क्योंकि मैं तुम्हें किसी के भी साथ शेयर करना बर्दाश्त नहीं कर सकता। तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी हो, और हमेशा से सिर्फ मेरे लिए ही बनी हो।"

देव की इस गहरी, अधिकारपूर्ण बात ने अवनि के पूरे वजूद में जैसे आग लगा दी। उसका गोरा चेहरा लाज और उत्साह के मारे पूरी तरह फ्लश हो गया, उसके गालों की सुर्खी और गहरी हो गई। उसने अपनी नजरें फिर से चुरा लीं।

देव ने अपनी उंगलियों से अवनि के चेहरे पर बिखरी बालों की एक लट को उसके कान के पीछे सरकाया और एक चुलबुली आह भरते हुए कहा, "सच कहूं अवनि, तो बाहर जो शादियों की रस्में और थकान थी, उसे देखकर मैंने सोचा था कि आज रात मैं सिर्फ आराम करूँगा और सो जाऊंगा। लेकिन... तुम्हें इस रूप में अपने इतने करीब देखने के बाद, मुझे नहीं लगता कि आज रात मुझे एक पल के लिए भी नींद आने वाली है।"

अवनि ने घबराकर देव को देखा, तो देव ने उसकी आंखों में आंखें डालते हुए बेहद सलीके से कहा, "अपनी ये खूबसूरत आँखें झुकाओ मत अवनि, जरा मेरी आँखों में देखो।"

अवनि ने बहुत ही डरते-डरते, अपनी भीगी और मासूम निगाहें देव की गहरी भूरी आँखों में टिका दीं। देव का चेहरा अब उसके और करीब आ चुका था, दोनों की नाक एक-दूसरे को लगभग छू रही थीं।

देव ने अपनी आवाज को बेहद रूमानी और नजाकत से भरते हुए पूछा, "क्या तुम मुझे इजाजत दोगी... कि मैं तुम्हें अपनी मर्जी से प्यार कर सकूं? क्या तुम मुझे अपने साथ थोड़ी शैतानी और नटखटपन (naughty) करने की इजाजत दोगी? और... क्या तुम मुझे हक दोगी कि मैं तुम्हें तुम्हारी पूरी जिंदगी इसी तरह बेइंतहा प्यार करता रहूं?"

देव के इन सवालों में इतनी शिद्दत और समर्पण था कि अवनि का दिल पूरी तरह पिघल गया। उसका वह पुराना डर अब पूरी तरह खो चुका था। उसने बेहद शर्माते हुए, अपनी पलकें झुकाकर बहुत धीरे से हामी में अपना सिर हिला दिया ।

अवनि की सहमति मिलते ही देव के चेहरे पर एक रूहानी खुशी छा गई। उसने बड़ी आत्मीयता और लाड से अवनि के दोनों कोमल गालों को अपने बड़े, गर्म हाथों के प्याले में भर लिया।

देव की हथेलियों का वह सीधा स्पर्श अवनि के चेहरे पर होते ही वह अंदर तक कांप उठी। घबराहट और एक अनजाने रोमांच के मारे वह बिस्तर पर थोड़ा और पीछे की तरफ खिसक गई ।

देव ने थोड़ा हैरान होते हुए अपनी भौहें उठाईं और पूछा, "क्या हुआ अवनि? तुम पीछे क्यों हट रही हो?"

अवनि ने अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी उंगलियों में कसकर भींचा और बेहद दबी, मासूम आवाज में कहा, "वो... मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि... शादी की पहली रात... बहुत दर्द होता है। मुझे उस बात से बहुत डर लग रहा है।"

अवनि का यह मासूम डर देखकर देव के चेहरे पर एक बेहद शांत और दिलासा देने वाली मुस्कान आ गई। वह थोड़ा और आगे बढ़ा, अवनि के डर को अपने करीब लाते हुए बोला, "अरे बुद्धू... ऐसा कुछ नहीं होगा। मैं हूँ ना तुम्हारे साथ? तुम्हें बिल्कुल दर्द नहीं होने दूंगा, यह मेरा वादा है।"

अवनि ने अविश्वास से अपना सिर हिलाया और अपने निचले होंठ को सिकोड़ते हुए बोली, "नहीं... आप झूठ बोल रहे हैं। पुरुष ऐसा ही कहते हैं।"

देव ने मुस्कुराते हुए उसके चेहरे को थोड़ा और अपनी तरफ झुकाया और बेहद चुलबुले अंदाज में पूछा, "अच्छा? तो तुम्हें अपने इस पति पर भरोसा नहीं है? क्या तुम मुझ पर बिल्कुल भी ट्रस्ट नहीं करतीं?"

अवनि ने देव की आँखों में छिपे असीम लाड को देखा, जहाँ झूठ का कोई नामोनिशान नहीं था। उसने बेहद विनम्रता और मासूमियत से 'हाँ' में अपना सिर हिला दिया।

"तो फिर... मुझे अपना वादा पूरा करने दो और तुम्हें प्यार करने दो," देव ने मखमली आवाज में कहा।

और इससे पहले कि अवनि उसकी बात का मतलब समझ पाती, देव अचानक थोड़ा और आगे झुका और उसने अवनि के गुलाबी, नाजुक होठों पर एक झटके से एक नन्हा सा, प्यारा सा चुंबन चुरा लिया। देव के इस अचानक हुए वार से अवनि पूरी तरह स्तब्ध रह गई। उसकी आँखें विस्मय से खुली की खुली रह गईं।

अवनि अभी इस पहले झटके से संभल भी नहीं पाई थी कि देव दोबारा उसकी तरफ झुका। इस बार उसका इरादा सिर्फ चुंबन चुराने का नहीं था। उसने अपनी मजबूत पकड़ से अवनि के होठों को अपने होठों के घेरे में ले लिया और बेहद शिद्दत, दीवानगी और पैशन के साथ उसे स्मूच करने लगा। देव के होठों की कशिश और गर्माहट अवनि के पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गई। अवनि ने लाज के मारे अपने चेहरे को दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश की, लेकिन देव ने बेहद कोमलता पर मजबूती से उसके गालों को थाम रखा था, जिससे अवनि चाहकर भी अपना मुंह नहीं मोड़ पाई। धीरे-धीरे अवनि का विरोध भी देव के उस दीवानेपन में खो गया।

होठों से अलग होकर देव रुका नहीं। वह अवनि के पूरे चेहरे पर अपने प्यार के निशान छोड़ने लगा। उसने अवनि की बंद आंखों को चूमा, उसके माथे के सिंदूर को अपने होठों से छुआ, उसकी मखमली गर्दन पर अपनी सांसें छोड़ीं। और फिर, शरारत के मूड में आकर, देव ने अवनि के दाहिने गाल पर अपनी दातों से एक हल्का सा कट मार दिया।

"आह!..." अवनि के मुंह से एक तीखी आवाज निकली। देव की इस चुलबुली हरकत पर अवनि को बहुत लाड भरा गुस्सा आया। उसने बिना सोचे-समझे अपना छोटा सा हाथ उठाया और देव के गाल पर एक हल्का सा थप्पड़ रसीद कर दिया।

देव ने नाटक करते हुए अपने गाल पर हाथ रखा और बेहद मासूम चेहरा बनाकर पूछा, "उफ! यह किस बात की सजा मिली मुझे? अपनी ही बीवी को प्यार करने की?"

अवनि ने नकली गुस्से में अपनी भौहें तान लीं और शिकायत करते हुए बोली, "आपने मेरे गाल पर दांत काट लिया! कल सुबह तक यहाँ निशान पड़ जाएगा, सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे? माँ जी क्या कहेंगी?"

अवनि का यह गुस्सा देव को इतना प्यारा लगा कि उसकी शरारत और बढ़ गई। "अच्छा? निशान पड़ जाएगा? तो फिर इस बेचारे अकेले गाल ने क्या बिगाड़ा है? इसे बुरा लग जाएगा," कहते हुए देव ने फुर्ती से अवनि के दूसरे गाल पर भी एक और हल्का सा दांत काट लिया।

"उई मां!..." अवनि चीख उठी और उसने तुरंत अपने दोनों गालों पर अपने हाथ रख लिए। उसका चेहरा गुस्से, लाज और चिढ़ के मारे पूरी तरह फूल गया। उसने गुस्से में अपने गालों में हवा भर ली और देव को घूरने लगी।

देव अवनि के इस बेहद क्यूट और बचकाने रूप को देखकर खिलखिलाकर हंस पड़ा। उसने अवनि के फूले हुए गालों को अपनी उंगलियों से हल्के से दबाया, जिससे हवा बाहर निकल गई, और बेहद चुलबुले अंदाज में आँख मारते हुए कहा, "लो, अब दोनों तरफ बराबर हो गया। अब कोई शिकायत मत करना!"

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